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इनसे बनती है 5 ट्रिलियन इकॉनमी बाबूजी!

इधर 5 ट्रिलियन इकॉनमी की बड़ी चर्चा है. हमारे वरिष्ठ सहयोगी और अर्थशास्त्री, फोटोग्राफर प्रोफ़ेसर मृगेश पाण्डे ने इस वक्तव्य को ध्यान में रखते हुए एक शानदार फोटो निबंध तैयार किया है. साथ ही उन्होंने एक दोहा भी लिख कर भेजा है: (Five Trillion Economy Photo Essay)

उड़ि उड़ि  बैठी क़स्बा गों शहर की दुकनिया 
मुनिया तो सब रस चूस गयी यहाँ बीच बजरिया

[तीसरी कसम की याद में]

कम लिखे को ज्यादा समझना, प्रभु! (Five Trillion Economy Photo Essay)

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जीवन भर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुल महाविद्यालयों में अर्थशास्त्र की प्राध्यापकी करते रहे प्रोफेसर मृगेश पाण्डे फिलहाल सेवानिवृत्ति के उपरान्त हल्द्वानी में रहते हैं. अर्थशास्त्र के अतिरिक्त फोटोग्राफी, साहसिक पर्यटन, भाषा-साहित्य, रंगमंच, सिनेमा, इतिहास और लोक पर विषदअधिकार रखने वाले मृगेश पाण्डे काफल ट्री के लिए नियमित लेखन करेंगे.

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