इजराइल के कवि येहूदा आमीखाई (Yehuda Amichai 1900-2000) बीसवीं शताब्दी के सबसे चर्चित लेखकों में रहे. युद्ध की विभीषिका और ठोस ऐन्द्रिक प्रेम उनकी कविताओं के मुख्य विषय थे. अपने देश में उनकी कविताओं की ख्याति का अंदाजा इस तत्थ्य से लगाया जा सकता है कि उनके कविता पाठों में पन्द्रह-बीस हज़ार की भीड़ आराम से पहुँच जाती थी. हर समय युद्ध के लिए तत्पर रहने को विवश इजराइल के युवा वर्ग में उनकी लोकप्रियता का आलम यह है कि आज भी हर युवा के रकसैक में बंदूक के साथ आमीखाई की किताब ज़रूर मिल जाती है. प्रस्तुत है उनकी एक विख्यात रचना.
येहूदा आमीखाई
बम का व्यास
-येहूदा आमीखाई
तीस सेन्टीमीटर था बम का व्यास
और इसका प्रभाव पड़ता था सात मीटर तक
चार लोग मारे गए, ग्यारह घायल हुए
इनके चारों तरफ़ एक और बड़ा घेरा है – दर्द और समय का
दो हस्पताल और एक कब्रिस्तान तबाह हुए
लेकिन वह जवान औरत जिसे दफ़नाया गया शहर में
वह रहनेवाली थी सौ किलोमीटर से आगे कहीं की
वह बना देती है घेरे को और बड़ा
और वह अकेला शख़्स जो समुन्दर पार किसी
देश के सुदूर किनारों पर
उसकी मृत्यु का शोक कर रहा था –
समूचे संसार को ले लेता है इस घेरे में
और अनाथ बच्चों के उस रुदन का तो मैं
ज़िक्र तक नहीं करूंगा
जो पहुंचता है ऊपर ईश्वर के सिंहासन तक
और उससे भी आगे
और जो एक घेरा बनाता है बिना अन्त
और बिना ईश्वर का.
(कविता पर आधारित यह वीडियो हमारे साथी राहुल पाण्डेय ने बनाया है.)
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