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उत्तराखंड की संस्कृति

उत्तराखंड, जिसे प्यार से “देवभूमि” कहा जाता है, उस अद्भुत सांस्कृतिक विविधता, परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध इस पहाड़ी राज्य की संस्कृति में लोगों की सादगी, प्रकृति के प्रति सम्मान, गहरी धार्मिक आस्था झलकती है. यहीं पर पीढ़ी दर पीढ़ी चली आने वाली परंपराएं राज्य की पहचान को संजोए हुए हैं. (Culture of Uttarakhand)

उत्तराखंड का धार्मिक महत्व बहुत गहरा है. यहाँ के चार धाम – बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री – न केवल धार्मिक स्थलों के रूप में प्रसिद्ध हैं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था और शांति के केंद्र भी हैं. हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे स्थानों का नाम सुनते ही योग और अध्यात्म की छवि सामने आती है. यहाँ हर त्योहार और मेला, चाहे वह नंदा देवी मेला हो या गंगा दशहरा, पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है.

उत्तराखंड का लोक संगीत और नृत्य इसकी संस्कृति की आत्मा हैं. झोड़ा, चांचरी और मंगल जैसे लोकगीतों में जीवन की सरलता और गहराई समाई होती है. यहाँ के लोक नृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे हुड़का और रंवाई के साथ मिलकर, किसी भी उत्सव को खास बना देते हैं. यह संगीत न केवल मनोरंजन है, बल्कि जीवन के हर छोटे-बड़े क्षण का उत्सव है.

उत्तराखंड का आहार है भी अपने सादगी और स्वास्थ्यप्रद जीवनशैली का प्रतिबिंब. मंडुए की रोटी, भट्ट की चुड़कानी और आलू के गुटके यहाँ के लोगों की दिनचर्या का हिस्सा हैं. पहाड़ी मसालों और पारंपरिक पकाने के ये व्यंजन स्वाद के साथ-साथ पोषण से भरपूर होते हैं.

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यहाँ के लोग अपने पहनावे में भी अपनी संस्कृति को सजीव रखते हैं. महिलाएँ पारंपरिक घाघरा-चोली और रंग-बिरंगे आभूषण पहनती हैं, जबकि पुरुष साधारण धोती-कुर्ता में नजर आते हैं. खास मौकों पर पहने जाने वाले पारंपरिक परिधान, यहाँ के समाज और परंपराओं के प्रति गहरा लगाव दिखाते हैं.

उत्तराखंड में त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का जरिया हैं. हरेला, फूलदेई, हरेला, दीपावली और होली जैसे त्योहारों पर हर घर में उमंग और उत्साह होता है. उस समय गाँवों और कस्बों में लोग सामूहिक नृत्य करते हैं, गीत गाते हैं और अपने रिश्तों को और मजबूत बनाते हैं.

उत्तराखंड की संस्कृति में प्रकृति विशेष स्थान रखती है. इस धरती पर नदियों, पहाड़ों और पेड़ों की पूजा की जाती है. चिपको आंदोलन, जो पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बना, इसी धरती पर मनाया गया. उत्तराखंड के लोग प्रकृति को अपनी ज़िंदगी का अभिन्न हिस्सा मानते हैं और इसे बचाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं.

उत्तराखंड की संस्कृति अपने आप में एक खूबसूरत कहानी है, जो प्रकृति का महत्त्व, परंपरा का महत्त्व, और आध्यात्मिकता के महत्व को समझाती है. यहाँ के लोग, उनकी परंपराएँ और उनकी जीवनशैली, सब मिलकर एक ऐसी तस्वीर बनाते हैं, जो अपने सरल लेकिन गहरे संदेशों से हमें प्रेरित करती है. उत्तराखंड की संस्कृति उसकी आत्मा है, जो हर किसी को अपनी ओर खींचती है.

रुद्रपुर की रहने वाली ईशा तागरा और देहरादून की रहने वाली वर्तिका शर्मा जी. बी. पंत यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, पंतनगर में कम्युनिटी साइंस की छात्राएं हैं, फ़िलहाल काफल ट्री के लिए रचनात्मक लेखन कर रही हैं.

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Sudhir Kumar

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