फोटो : जयमित्र सिंह बिष्ट
संस्कृति और सभ्यता की एक ख़ास खुशबू में लिपटे अल्मोड़ा को और ख़ास बना देती है उसकी भौगोलिक स्थिति. कोसी और सुयाल नदी के बीच बसा अल्मोड़ा, कुमाऊं हिमालय की दक्षिणी चोटी के दोनों ओर बसा है. अल्मोड़ा कुमाऊं ही नहीं बल्कि भारत के सबसे पुराने आधुनिक शहरों में एक है.
(Almora Photo Essay)
कुमाऊं हिमालय की जिस चोटी पर अल्मोड़ा स्थित है उसके पूर्वी भाग को तेलीफट और पश्चिमी भाग को सेलीफट के नाम से जाना जाता है. चोटी के शीर्ष पर जहां तेलीफट और सेलीफट मिलते हैं वहां पर अल्मोड़ा बाज़ार स्थित है.
अपनी इसी भौगोलिक बनावट के चलते अल्मोड़ा की खूबसूरती के आगे देश और दुनिया के बड़े-बड़े लोग नतमस्तक हुये हैं. सुकून देने वाली अल्मोड़ा की सुबह और शाम सबकुछ भूला देती है. बारिश के बाद का मौसम अल्मोड़ा के मौसम को और ख़ुशनुमा बना देता है. इस सब पर चांद की रौशनी में नहाते जीवंत अल्मोड़ा को केवल महसूस किया जा सकता है. सफ़ेद बादलों के आगोश में हिमालय की दिखती-छुपती चोटियों के दुर्लभ दृश्य का जो आनन्द अल्मोड़ा में है वह अन्य जगह नहीं.
(Almora Photo Essay)
काफल ट्री के अनन्य साथी जयमित्र सिंह बिष्ट के कैमरे से देखिये अल्मोड़ा की सुबह का जादू:
काफल ट्री के फेसबुक पेज को लाइक करें : Kafal Tree Online
जयमित्र सिंह बिष्ट
अल्मोड़ा के जयमित्र बेहतरीन फोटोग्राफर होने के साथ साथ तमाम तरह की एडवेंचर गतिविधियों में मुब्तिला रहते हैं. उनका प्रतिष्ठान अल्मोड़ा किताबघर शहर के बुद्धिजीवियों का प्रिय अड्डा है. काफल ट्री के अन्तरंग सहयोगी.
इसे भी पढ़ें : अल्मोड़े में होली के रंग: फोटो निबंध
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
हाल ही में मेरी उत्तराखंड यात्रा, हरिद्वार, मसूरी, देहरादून और टिहरी, ने मुझे यह गहरा एहसास कराया कि…
रात ढलते ही जब सुबनी और लाली दोनों बहनें पानी भरने के लिए गाँव के…
चीड़ के जंगल उत्तराखण्ड के कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्र में 900 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर बहुतायत में पाये…
2013 सन् में नेशनल बुक ट्रस्ट ने देवेन्द्र मेवाड़ी की किताब 'मेरी यादों का पहाड़' छापकर सराहनीय…
नौ साल बाद पिथौरागढ़ जा रहा था. पिछले कुछ वर्षों में जब भी छुट्टी मिली, बेटी…
देवी मां उदास है परन्तु परलोक गया पुत्र आज भी यादों में आकर उसको हिम्मत…